भारत के प्रधानमंत्री और उनके समय की महत्वपूर्ण उपलब्धियां

आजादी के पूर्व भारत की स्थिति और महत्वपूर्ण चुनौतियां

वर्ष 1947 में जब हमारा देश आजाद हुआ तो आजादी के पश्चात हमारे देश के सामने बहुत सी चुनौतियां थी। इन चुनौतियों में मुख्य रूप से आर्थिक पिछड़ापन, अशिक्षा, सामाजिक असमानता तथा सुरक्षा जैसी समस्याएं थी। इन सभी समस्याओं से निपटने हेतु एक महत्वपूर्ण शासन पद्धति और कुशल नेतृत्व की आवश्यकता को महसूस किया जा रहा था।
भारत में ब्रिटिश शासन की समाप्ति के पूर्व लगभग 562 देसी रियासते थी। जिनका निर्माण ब्रिटिश सरकार ने अपनी सुविधा के अनुसार किया था। इन सभी रियासतों का एकीकरण सबसे बड़ी समस्या थी। सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इन रियासतों को भारत में मिलाकर एक सूत्र में बांधा और भारत को मौजूदा स्वरूप प्रदान किया।
जूनागढ़, हैदराबाद तथा कश्मीर को छोड़कर 562 रियासतों ने स्वेच्छा से भारतीय परिसंघ में शामिल होने की स्वीकृति प्रदान कर दी थी। इस समय सरदार पटेल अंतरिम सरकार में उपप्रधानमंत्री और साथ-साथ देश के गृहमंत्री थे।

जवाहरलाल नेहरू और भारत का नवनिर्माण

महात्मा गांधी के संरक्षण में जवाहरलाल नेहरू भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सर्वोच्च नेता बनकर उभरे। वह भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के साथ साथ स्वतंत्रता के पूर्व और पश्चात कि भारतीय राजनीति में केंद्रीय व्यक्तित्व थे। नेहरू जी ने 1947 से लेकर 1964 तक भारत में प्रधानमंत्री का अब तक का सबसे लंबा कार्यकाल व्यतीत किया। वे 16 साल 9 महीने और 12 दिन तक प्रधानमंत्री रहे। वे आधुनिक भारतीय राष्ट्र राज्य-एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के वास्तुकार माने जाते हैं।
अपने नेतृत्व काल में नेहरू ने ‘योजना आयोग’ का गठन किया और साथ ही साथ ‘पंचवर्षीय योजनाओं’ को भी लागू किया, जिसके माध्यम से गरीबी, अशिक्षा, उद्योगों का विकास और किसी पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इसके अलावा भाखड़ा नांगल बांध (पंजाब), हीराकुंड बांध (उड़ीसा) और नागार्जुन सागर बांध (आंध्र प्रदेश) जैसी परियोजनाओं को प्रारंभ कर सिंचाई की समस्या को भी दूर करने का प्रयास किया गया। साथ ही, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास हेतु ‘आणविक ऊर्जा संयंत्र, ट्राम्बे (1954), DRDO (1958) तथा भाभा आणविक केंद्र (1967)’ का निर्माण भी हुआ।
नेहरू ने विदेश नीति में, भारत को दक्षिण एशिया में एक क्षेत्री नायक के रूप में प्रदर्शित करते हुए, गुटनिरपेक्ष आंदोलन में एक अग्रणी भूमिका निभाई। उनके अंतिम वर्ष में 1962 के ‘चीन-भारत युद्ध’ में एक कुशल नेतृत्वकर्ता का परिचय दिया। हालांकि यह युद्ध भारत हार गया लेकिन इसके बावजूद नेहरू लोकप्रिय बन गए।

लाल बहादुर शास्त्री की उपलब्धियां

सन 1964 में जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के पश्चात 1964 से 1966 तक 18 महीने लाल बहादुर शास्त्री जी ने भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। इनके शासनकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘भारत पाकिस्तान के बीच 1965 में हुआ युद्ध’ में विजय थी। 1962 में चीन से हुए युद्ध में भारत को पराजय मिली थी, लेकिन इस युद्ध में शास्त्रीजी ने नेहरू के मुकाबले राष्ट्र को अपनी सूझबूझ से उत्तम नेतृत्व प्रदान किया तथा पाकिस्तान को करारी शिकस्त दी।
ताशकंद में पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के साथ युद्ध समाप्त करने के समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद 11 जनवरी, 1966 की रात में उनकी रहस्यमय तरीके से मौत हो गई। 10 जनवरी, 1966 को भारत और पाकिस्तान के मध्य सोवियत संघ की मध्यस्थता से एक समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित हुआ था, जिसे ‘ताशकंद समझौते’ के नाम से जाना जाता है।

इंदिरा गांधी के रूप में एक सशक्त प्रधानमंत्री का आविर्भाव

इंदिरा गांधी 1966 से 1977 तक लगातार तीन बार भारतीय गणराज्य की प्रधानमंत्री रही। वे भारत की प्रथम और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रही। वर्ष 1966 में जब इंदिरा जी प्रधानमंत्री बनी तो कांग्रेस का दो गुटों में बटवारा हो गया था। एक गुट इंदिरा गांधी के नेतृत्व का समाजवादी और दूसरा मोरारजी देसाई के नेतृत्व का रूढ़िवादी था। वर्ष 1967 में चुनाव में आंतरिक समस्याओं के वर्ण कारण इंदिरा जी को मोरारजी देसाई को भारत के उप प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में लेना पड़ा वर्ष 1969 में इनके काल में ‘बैंकों का राष्ट्रीयकरण’ किया गया जिसमें 14 राष्ट्रीय कृत बैंक शामिल थे दूसरे चरण में 1980 में 6 और बैंकों को जोड़ दिया गया।
इसके अलावा वर्ष 1971 में ‘बांग्लादेशी शरणार्थियों की समस्या को हल’ करने के लिए उन्होंने पूरी पाकिस्तान की ओर से, जो अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे थे, पाकिस्तान पर युद्ध की घोषणा कर दी। इसी समय इंदिरा गांधी ने एक सतर्कता पूर्ण राष्ट्रीय और विदेश नीति को नई दिशा देते हुए सोवियत संघ के साथ मित्रता और आपसी सहयोग संधि को आगे बढ़ाया। जिसके परिणाम स्वरूप ‘1971 के युद्ध में भारत की पाकिस्तान पर जीत’ का श्रेय राजनीतिक और सैन्य समर्थन के पर्याप्त योगदान का रहा। इसी वर्ष 1972 में पाकिस्तान से अलग बांग्लादेश नाम से एक नया देश बना।
वैज्ञानिक उपलब्धियों में 1969 में ‘इसरो की स्थापना‘, 1975 में इसरो द्वारा निर्मित प्रथम उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ का लॉन्च शामिल है।
इन के शासन में 1975 से 1977 तक के समय को ‘आपातकाल’ के नाम से जाना जाता है। स्वतंत्रता के बाद के इतिहास में पहली बार ऐसा समय था जब तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद फैली अव्यवस्था और अराजकता को देखते हुए आपातकालीन स्थिति की घोषणा करने का संकेत दिया। जिसके बाद 26 जून 1997 को संविधान की धारा 352 के प्रावधान के अनुसार यह लागू हो गया।
तत्पश्चात 1977 में चुनाव हुआ और इंदिरा गांधी करारी हार हुई और पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार सत्ता में आई जिसके तहत मोरारजी देसाई प्रथम गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री बने। इस गैर कांग्रेसी दल में लोक दल, जनसंघ और सोशलिस्ट पार्टी शामिल थे। लेकिन आंतरिक ग्रहों की वजह से वर्ष 1979 में मोरारजी देसाई ने त्यागपत्र दे दिया। इसके बाद तत्कालीन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने संसद को भंग करते हुए चुनाव के आदेश दिए और पुनः इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री के रूप में निर्वाचित हुई। इंदिरा गांधी को (1983 से 1984) लेनिन शांति पुरस्कार से भी पुरस्कृत किया गया।
इंदिरा गांधी के शासनकाल में ही 3 से 6 जून 1984 तक अमृतसर स्थित हरमंदिर साहिब परिसर में ऑपरेशन ब्लूस्टार को भारतीय सेना द्वारा अंजाम दिया गया। अमृतसर में हुई ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ की घटना से आहत इंदिरा गांधी के दो सिख अंगरक्षको यशवंत सिंह और बेअंत सिंह ने उन्हें 31 अक्टूबर, 1984 को मार दिया।

राजीव गांधी का कार्यकाल

इंदिरा गांधी के अनिश्चितकालीन मृत्यु के पश्चात उनके पुत्र राजीव गांधी ने भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में 1984 से 1989 तक यह पद संभाला। इनके समय की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में संचार क्रांति मुख्य है। इन्होंने 1984 में ‘सी-डॉट’ की स्थापना और 1986 में ‘एमटीएनएल की स्थापना’ कर संचार क्रांति को बढ़ाया।
इसके साथ ही ’61 वें संविधान संशोधन, 1989′ को मंजूरी प्रदान कर इन्होंने वोट देने की आयु को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दिया था।

वीपी सिंह का कार्यकाल और मंडल कमिशन

राजीव गांधी के बाद 1989 में, राजीव गांधी की कैबिनेट में रहे विदेश मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। इनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘मंडल कमीशन रिपोर्ट को लागू करना’ था।
भारत में मंडल आयोग वर्ष 1989 में तत्कालीन जनता पार्टी की सरकार द्वारा स्थापित की गई थी। इस आयोग का कार्य सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ों की पहचान करना था। इस मंडल के अध्यक्ष बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल थे। 1990 में मंडल कमीशन ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी।
इस रिपोर्ट ने विभिन्न धर्मों और बंधुओं के 3743 जातियों को सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक मापदंडों के आधार पर सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा घोषित करते हुए 27% की रिपोर्ट सौंपी थी। जो SC, ST और OBC को मिलाकर कुल 49% था। इस कारण विद्यार्थीयों ने एक विरोध प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया था।

पीवी नरसिम्हा राव और उनकी उपलब्धियां

पीवी नरसिम्हा राव का पूरा नाम पामुलपर्ती वेंकटरमन नरसिन्हा राव था। भारत के दसवें प्रधानमंत्री के अतिरिक्त वे आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके थे। उनके समय की प्रमुख उपलब्धियों में ‘लाइसेंस राज की समाप्ति’ और भारतीय अर्थनीति में खुलेपन को लाना था।
1991 के समय भारत गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा था और भारत के नीति निर्माता को नई आर्थिक नीति लागू करने हेतु प्रेरित कर रहा था। उस समय मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे। इनके काल में ही भारत में नवीन आर्थिक नीति, 1991 लाई गई थी। नई आर्थिक नीति के प्रमुख तीन घटक ‘उदारीकरण, निजी करण और वैश्वीकरण’ थे।
नरसिम्हा राव को ‘आर्थिक सुधार का जनक’ भी कहा जाता है।

अटल बिहारी बाजपेई की उपलब्धियां

1998 से 2004 के बीच अटल बिहारी बाजपेई कुल 6 वर्ष तक में तीन बार प्रधानमंत्री पद पर सेवारत रहे। नई आर्थिक नीति बनाई तो नरसिम्हा राव ने थी पर इसे लागू करने का श्रेय अटल बिहारी वाजपेई को जाता है।
इनकी उपलब्धियों में 1974 के पश्चात वर्ष 1998 में राजस्थान के पोखरण में किया गया ‘परमाणु परीक्षण’ सर्वोपरि रहा। इसके अतिरिक्त शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों को परस्पर एक दूसरे के साथ जोड़ने के लिए 1999 में चलाई गई ‘स्वर्णिम चतुर्भुज योजना’ और इसी वर्ष भारत और पाकिस्तान के मध्य हुए हैं कारगिल युद्ध में विजय भी इनकी उपलब्धियों में चार चांद लगाते हैं।
कारगिल युद्ध को ‘ऑपरेशन विजय’ का नाम दिया गया इसी समय से दिल्ली लाहौर मैत्री बस सेवा भारत-पाकिस्तान के बीच रिश्तों को सुधारने की क्रम में चलाई गई।

मनमोहन सिंह का प्रधानमंत्रित्व काल

अटल बिहारी वाजपेई के पश्चात 2004 से लेकर 2014 तक मनमोहन सिंह लगातार दोबारा प्रधानमंत्री पद के रूप में कार्यरत रहे।
वर्ष 2009 में ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ( परिवर्तित नाम राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम 2005 एक्ट)’ के तहत मजदूरों को वर्ष में 100 दिन के पक्के रोजगार की व्यवस्था की शुरुआत की गई थी। इसे ही ‘नरेगा या मनरेगा’ के नाम से जाना जाता था।
इनकी अन्य उपलब्धियों को देखा जाए तो 2005 में सूचना के अधिकार नियम अर्थात् ‘आरटीआई’ और 2008 में भारत का पहला ‘लोनार मिशन’ में चंद्रयान प्रथम को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया जाना था।

नरेंद्र मोदी के रूप में एक सशक्त प्रधानमंत्री का काल

साल 2014 में जीत के बाद नरेंद्र मोदी को भारत का प्रधानमंत्री घोषित किया गया। इनके प्रधानमंत्री काल में भारत में आर्थिक, सामाजिक व वैश्विक दृष्टि से भूतपूर्व लक्ष्य को प्राप्त किया।
सबसे पहले 2014 में ही स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ‘जन-धन योजना’ की शुरुआत हुई। जिसका उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को बैंकिंग सुविधा से जोड़ना था। आर्थिक जगत में यह दुनिया की सबसे बड़ी योजना है। इस योजना ने अपने पहले सप्ताह में ही लगभग 1 करोड़ 81 लाख बैंक खाता खोलकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बुक में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी।
इसके बाद 2 अक्टूबर, 2014 को महात्मा गांधी के जन्मदिन के उपलक्ष में ‘स्वच्छ भारत मिशन’ की शुरुआत कर स्वच्छता कार्यक्रम को बढ़ावा दिया। तत्पश्चात 2015 में योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग का गठन, एक राष्ट्र एक टैक्स ‘जीएसटी‘ की शुरुआत भी की गई।
ग्रामीण क्षेत्र में विकास कार्य को आगे बढ़ाते हुए स्वच्छ भारत मिशन के तहत हर घर शौचालय, ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत गरीबों को घर का आवंटन, ‘उज्जवला योजना’ के तहत महिलाओं को फ्री एलपीजी कनेक्शन, गरीबों के स्वास्थ्य कल्याण हेतु ‘आयुष्मान योजना‘ और ‘सौभाग्य योजना’ के तहत आज भी बिजली से वंचित गांवों को विद्युत कनेक्शन देने का का रिकार्ड कार्य किया।
आर्थिक क्षेत्र में विकास हेतु स्वदेशी निर्माण की ‘मेक इन इंडिया’ पहल, नई सोच को बढ़ावा देने के लिए ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल, लोन की सुविधा के लिए ‘मुद्रा योजना’ आदि पर कार्य किया गया।
फरवरी, 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के पश्चात अपने सैन्य अभियानों के द्वारा पाकिस्तान को माकूल जवाब और विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान की रिहाई भारत के अन्य देशों के साथ मैत्रीपूर्ण नीति को दर्शाता है। अपने 5 वर्ष के कार्यकाल के दौरान नरेंद्र मोदी ना केवल योजनाओं को लेकर सहज दिखे बल्कि कूटनीति रणनीति और राजनीतिक तथा सामरिक संबंध स्थापित करने में भी इन्होंने पूर्व सरकारों से बेहतर कार्य किया।
अपने इन्ही योजनाओं के साथ वर्ष 2019 में बीते लोकसभा चुनाव में एक बार फिर से नरेंद्र मोदी सहित एनडीए गठबंधन ने देश में भारी बहुमत से जीत हासिल की। इस बार प्रधानमंत्री के सामने देश में पानी की समस्या, कश्मीर की समस्या और रोजगार की समस्या आदि जैसे महत्वपूर्ण चुनौतियां सामने हैं।

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स्रोत: अरिहंत समसामयिकी