GSAT-29

GSAT-29 का प्रक्षेपण

GSAT-29

 

बीते दिनों में इसरो ने एक बार फिर से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। हमारे इस ब्लॉग में हम इसी विषय में विस्तार से जानेंगे।

 

कब और कहाँ

GSAT-29 को 14 नवंबर दिन बुद्धवार को इसरो के द्वारा लांच किया गया। इसरो ने जीएसएलवी माक-3 रॉकेट की मदद से जीसैट-29 सैटलाइट सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। यह भारत के दूरदराज के क्षेत्रों में हाई स्पीड डेटा को ट्रांसफर करने में मदद करेगा। यह लांच श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेन्टर से किया गया। यह लॉन्च होने के बाद 10 साल तक काम करेगा।

 

आखिर क्या है GSAT-29 और क्यों है ख़ास

GSAT-29 इसरो के द्वारा निर्मित 33वीं कम्युनिकेशन सैटेलाइट हैं जो कि एक high-throughput communication satellite है, इससे इंटरनेट की स्पीड में सुधार होगा जिसमे खास तौर पर जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व राज्य शामिल है। यह कार्य पेलोड्स डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है। एक रोचक बात ये भी है की ये हमारे इसरो की तरफ से भेजा गया आज तक का सबसे वजनदार अर्थात भारी satellite है जिसका वजन 3324 किलोग्राम है और इसमें दुनिया के सबसे बड़े बूस्टर S200 का भी इस्तेमाल किया गया है। ये satellite लांच साल 2018 का इसरो के द्वारा पांचवा लांच है। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने में 15 साल लगे हैं और इसको पृथ्वी के जियो स्टेशनरी ऑर्बिट (जीएसओ) में स्थापित किया गया है। इस satellite में लगे onboard propulsion system के द्वारा इसको जिओ स्टेशनरी ऑर्बिट में बैठाया गया हैं।

 

कुछ जरुरी बातें

GSAT-29 सैटलाइट 3-D प्रौद्योगिकियों, क्यू ऐंड वी बैंड्स, ऑप्टिकल कम्युनिकेशन और एक हाई रेजॉल्यूशन कैमरा भी अपने साथ ले गया है जो कि स्पेस मिशन के लिए पहली बार है। इस लांच में जिस रॉकेट का इस्तेमाल किया गया वो GSLV Mk-3 है जिसका इस्तेमाल भारत अपने human mission में भी करने वाला है और यह इस रॉकेट का दूसरा डेवलपमेंट ट्रायल भी था। इस रॉकेट का वजन 640 टन हैं और ऊंचाई लगभग 13 मंजिल के बराबर हैं जो कि चार टन तक के उपग्रह लॉन्च कर सकता है। रॉकेट में स्वदेशी क्रोमियम इंजन लगा हैं और लिक्विड ऑक्सीजन और हाइड्रोजन को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता हैं।

|| जय हिन्द, जय भारत ||