स्टेचू ऑफ़ यूनिटी

विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा: स्टेचू ऑफ़ यूनिटी

किसी की याद और सम्मान में पुरे विश्व में स्टेचू लगाने की परंपरा बहुत ही पुरानी है. इसी क्रम में भारत के पहले उप-प्रधान मंत्री और पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की एक प्रतिमा का भारत के गुजरात राज्य में निर्मित की गयी है. पटेल जी ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में बल्कि आजादी के समय छिन्न भिन्न पड़े भारत के अनेक देसी रियासतों को भी भारत का मिलने का महत्वपूर्ण कार्य किया था. गुजरात के सरदार सरोवर बांध के पास साधु वेट द्वीप पर उनकी यह विश्व की सबसे ऊँची 182 मीटर की प्रतिमा बनाई गयी है और इसे स्टेचू ऑफ़ यूनिटी नाम दिया गया. भारत देश के १५ करोड़ किसानो के योगदान और 300 अभियंता समेत 3000 मजदूरों की लगातार 42  महीनो की अथक मेहनत का ही नतीजा है ये प्रतिमा. शायद यह भी एक वजह है जिससे यह हमारे भारत के गौरव और एकता का प्रतीक है. साथ ही साथ ये हमारे देश के कौशल और अभियांत्रिकी की भी मिसाल है. आपको ये जानकर बहुत आशर्य होगा की इसकी हाइट स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी की लगभग दुगुनी है. दुनिया की इस सबसे ऊँची प्रतिमा की कहानी भी इस प्रतिमा की तरह बहुत दिलचस्प है.

 

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी कहाँ स्थित हैं?

विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा कहा है तो अब इसका जबाब है भारत में. जी है गुजरात के नर्मदा जिले के केवडिया में स्थित यह प्रतिमा भारत की एकता के सूत्रधार सरदार बल्लभ भाई पटेल को समर्पित है. ये केवडिया में स्थित सरदार सरोवर बांध से 3.2 किमी दक्षिण में और अहमदाबाद से 200 किमी दूर स्थित है. ये प्रेरक स्मारक स्थल नर्मदा नदी की ओर सतपुड़ा और बिंध्यांचल पर्वतमाला बिंधेश्वर से घिरी सरदार सरोवर बंद और केवडिया शहर के बीच स्थित है.

 

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी की नीव और लागत

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी का ड्रीम प्रोजेक्ट है. 2010 में गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर मोदी जी ने इस प्रोजेक्ट की घोषणा करते हुए कहा था की ये प्रतिमा लोगो के लिए प्रेरणा का स्रोत होगा. इस परियोजना का सुभारम्भ 31 अक्टूबर 2013 को सरदार जी के जयंती के मौके पर तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा किया गया था. उसी वक़्त ही देश भर में मूर्ति के लिए लोहा के संचय का अभियान शुरू किया गया. गुजरात सरकार का यह भी दावा है की इस प्रोजेक्ट के लिए देश के लगभग 7 लाख ग्रामो से लोहा जमा किया है. सरदार जी के इस प्रोजेक्ट के लिए ही सरदार बल्लभ भाई पटेल एकता ट्रस्ट भी बनाया गया. इस प्रतिमा के निर्माण का कार्य गुजरात सरकार ने अक्टूबर 2014 में भारत की अभियंता कंपनी लेज़र एंड टर्बो को सौपा. विश्व की सबसे ऊँची इस प्रतिमा की निर्माण योजना को केंद्रीय बजट 2014-15 में राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर दिया गया और उसी वक़्त केंद्र ने इस योजना के लिए 200 करोड़ आवंटित किये. इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करीब 3 हजार करोड़ रूपये है. इस 3 हजार करोड़ में प्रतिमा के निर्माण के खर्च के साथ ही अगले 15 सालो के रख रखाव का खर्च भी शामिल है.

 

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी की विशेषताए

1. इस प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर है.
2. इस प्रतिमा को 7 किमी से देखा जा सकता है.
3. इस प्रतिमा के जैकेट के एक बटन का ब्यास ही 2.5  मीटर है.
4. इस प्रतिमा में 75 घन मीटर बजरी, 5 हजार 700 मीट्रिक टन स्टील, 18 हजार 500 लोहे की छडे और 22 हजार 500 मीट्रिक सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है.
5. इस प्रतिमा का मूल ढांचा कंकरीट और स्टील का बनाया गया है जबकि ऊपरी ढांचा 553 कांस्य पैनल से बनाया गया है. हर एक कांस्य पैनल में 10-15 माइक्रो पैनल लगे हुए है.
6. प्रसिद्ध मूर्तिकार रामवान जी सुतार ने इस प्रतिमा का डिज़ाइन तैयार किया है.
7. इस प्रतिमा में दो लिफ्ट भी लगी है जिससे पर्यटक सरदार जी के हृदय तक जा सकेंगे.
8. इस प्रतिमा के साथ 143 मीटर की ऊंचाई पैर एक दर्शक गैलरी भी बनाई गयी है. जिसके पास 200 पर्यटकों की क्षमता है.
9. इस प्रतिमा के भूतल पैर सरदार पटेल के जीवन पैर आधारित एक प्रदर्शनी भी है.
10. इस प्रतिमा का निर्माण भूकंप-रोधी और जंग-रोधी तकनीकी से किया गया है.
11. इस प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर होने की वजह यहाँ के विधान सभा में 182 सीटों का होना है.
12. गुजरात सरकार के अनुसार इससे राज्य की पर्यटन आमदनी में बढ़त होगी. प्रतिदिन यहाँ 15 हजार पर्यटक आने की संभावना है.
13. इस प्रोजेक्ट से यह हर वर्ष 15 हजार आदिवासी लोगो को रोजगार मिलेगा.

 

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी के निर्माण के पीछे की कहानी

कहा जाता है की सपना जितना बड़ा होता है उससे पूरा करने की चुनौती भी उतनी ही बड़ी होती है. यही आशंका सरदार पटेल की इस मूर्ति को लेकर भी थी. पहली चुनौती सरदार जी के कपड़ो और आकृति को लेकर थी. सरदार जी का यह स्टेचू उनके असल जिंदगी से प्रेरित है जो 1949 में खींची गयी फोटो से जुडी है. दूसरी चुनौती कांस्य के ढलाई की थी. असल रूप से पूरी प्रतिमा का वजन उसके पैरो पर आना था. इसके लिए देश के प्रमुख ढलाई घरो को सर्वेक्षण किया गया लेकिन सबने इस काम को करने में असमर्थता जताई. तब काफी छानबीन के चीनी की कंपनी को इसकी ढलाई का काम दिया गया. सरदार पटेल की फोटो तय हो जाने के बाद मशहूर शिल्पकार रामसुतार को लाया गया फिर विभिन्न प्रतिक्रियाओ और सुझाव के आधार पर सुतार जी ने मूर्ति तैयार की. तत्पश्चात अलग अलग समूहों से परामर्श के बाद इससे अंतिम रूप दिया गया. चीन से कांस्य ढलाई की खेप आने के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ. कांस्य की पूरी परत चढाने के लिए अलग-अलग आकर की खरीद 7 हजार प्लेटो की एक-साथ वेल्डिंग की गयी. यह काम भी बहुत ही चुनौती पूर्ण रहा.

 

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी इंजीनियरिंग का नायब नमूना क्यों?

1. प्रतिमा की सबसे नीची परत का निर्माण आरसीसी से हुआ है.
2. प्रतिमा में 127 मीटर ऊँचे दो टॉवर है.
3. प्रतिमा की दूसरी परत स्टील से बना ढांचा है.
4. प्रतिमा की सबसे बाहरी परत 8 मिलीमीटर मोटे कांस्य से बनाया गया है.

 

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी और अन्य स्टेचू की तुलना

1. चीन में स्थित स्प्रिंग टेम्पल ऑफ़ बुद्धा की ऊंचाई 153 मीटर है.
2. जापान के उशिकु दाइबुत्सु की ऊंचाई 120 मीटर है.
3. म्यांमार की बुद्धा की प्रतिमा की ऊंचाई 116 मीटर है.
4. न्यूयोर्क के स्टेचू ऑफ़ लिबर्टी की ऊंचाई 93 मीटर है.
5. रूस के द मदर लैंड कॉल्स की ऊंचाई 85 मीटर है.
6. रिओ द जिनारिओ के क्राइस्ट द रिडीमर की ऊंचाई 38 मीटर है.

 

देश के पहले उप प्रधान मंत्री और ग्रह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को समर्पित स्टेचू ऑफ़ यूनिटी न केवल मेहनत, लगन और इंजीनियरिंग का नायब नमूना है बल्कि इससे पूरी दुनिया में भारत का मान भी बढेगा. सरदार वल्लभ भाई पटेल के 143 जन्मदिन पर बनी इस प्रतिमा एक दिन(10 अक्टूबर) में 27,000 आगंतुकों को रिकॉर्ड कायम किया है.