CBI

सीबीआई का इतिहास

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ( CBI )

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानि की सीबीआई भारत सरकार की प्रमुख जांच एजेंसी है| उद्यमिता, निष्पक्षता और सत्य-निष्ठा सीबीआई का आदर्श वाक्य है| अपने आदर्श शब्द को सही साबित करते हुए इस जांच एजेंसी ने अपने स्थापना के बाद से ही अलग पहचान बनायीं| सीबीआई गंभीर आपराधिक मामलो की जाँच करने के साथ ही कानून लागू करने में अन्तर्राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मूल एजेंसी के रूप में काम करती है| सीबीआई देश की सबसे भरोसेमंद जाँच एजेंसी है जिसे हमेशा चुनौतीपूर्ण मामले सौंपे जाते है और इसने हमेशा बेहतरीन नतीजे भी दिए है| ऐसे में हमे सीबीआई का इतिहास जानना बहुत जरूरी हो जाता है|

सीबीआई के गठन की कहानी 1941 से शुरू होती है और 1963 में इस वर्तमान जाँच एजेन्सी को सीबीआई नाम मिला| फ़िलहाल पुरे भारत में सीबीआई के 10 रीजनल जोन है जिनके कार्य-क्षेत्र में देश के अलग-अलग हिस्से आते है| निदेशक सीबीआई का प्रमुख होता है जो की एक DGP रैंक का IS अधिकारी होता है| अब एक नजर डालते है सीबीआई के इतिहास और बनने से लेकर विस्तार से जुड़े पहलुओं पर:

सीबीआई भारत देश की सर्वोच्च जाँच एजेंसी है जो गंभीर मामलो के जाँच के साथ ही भ्रष्टाचार का सफाया करने में जुटी पुलिस बलों को सहायता प्रदान करने की दोहरी जिम्मेदारी निभाती है|

सीबीआई की स्थापना और विशेष पुलिस प्रतिष्ठान

सीबीआई की उत्पत्ति विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अर्थात Special Police Establishment से हुई| इसकी स्थापना भारत सरकार ने साल 1941 में की| उस समय special police establishment यानि SPE का मुख्य काम दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भारत युद्ध आपूर्ति विभाग के साथ लेन-देन में रिश्वतखोरी और करप्शन के मामलो की पड़ताल करना था|

ये एजेंसी उस वक़्त युद्ध विभाग के आधीन थी| दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद सरकार के कर्मचारियों से सम्बंधित रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलो की जांच करने के लिए केंद्रीय सरकार की एक जांच एजेंसी की जरूरत महसूस की गयी और इसे ही ध्यान में रखते हुए 1946 में दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान अधिनियम लागू किया गया| इस अधिनियम के जरिये दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट, गृह विभाग के अधीन लाया गया| साथ ही इसके अधिकार क्षेत्र के दायरे में भारत सरकार के सभी विभागों को लाया गया| एजेंसी के क्षेत्राधिकार का सभी संघशासित राज्यों में विस्तार किया गया और सम्बंधित राज्य सरकारों की सहमति ही राज्यों तक भी इसका विस्तार किया जा सकता था|

दिल्ली स्पेशल पुलिस स्टैब्लिशमेंट को ही 1963 में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानि सीबीआई का वर्तमान नाम हासिल हुआ| एजेंसी ने यह नाम गृह मंत्रालय के 1 अप्रैल 1963 के संकल्प के जरिये प्राप्त किया| शुरुवात में केंद्र सरकार की तरफ से केवल उन्ही अपराधों को सूचित किया गया जिनका सम्बन्ध केंद्र सरकार के कर्मचारियों द्वारा किये गए भ्रष्टाचार से था| आगे चलकर बड़े पैमाने पर सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों की स्थापना होने से इन कर्मचारियों को भी सीबीआई जाँच दायरे में लाया गया| 1969 ईसवी में बैंको के राष्ट्रीयकरण होने से सरकारी क्षेत्र के बैंको और उनके कर्मचारी भी सीबीआई क्षेत्र के दायरे में आ गए|

डी पी कोहली

सीबीआई के पहले निदेशक डी पी कोहली थे जो 1अप्रैल 1969 से 31 मई 1968 तक निदेशक रहे| इससे पहले डी पी कोहली जी साल 1955 से 1963 तक विशेष पुलिस प्रतिष्ठान के पुलिस महानिरीक्षक रहे| उससे पहले उन्होंने तत्कालीन मध्य भारत उत्तर-प्रदेश और भारत सरकार के महकमों में विभिन्न जिम्मेदारी वाले पदों पर काम किया| विशेष पुलिस प्रतिष्ठान का कार्य-भाल सँभालने के पहले डी पी कोहली मध्य भारत में पुलिस प्रमुख भी रहे| उन्हें विशिष्ट सेवाओं के लिए 1967 में पद्म-भूषण से सम्मानित किया गया था|

सीबीआई का विस्तार

स्थापना के बाद सीबीआई धीरे धीरे सीबीआई राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के तौर पर उभरने लगी| 1965 के बाद से सीबीआई को आर्थिक अपराधों के साथ ही हत्या, अपहरण, आतंकवादी अपराध जैसे परम्परागत स्वरूप के महत्वपूर्ण अपराधों के चुनिंदा मामलो की जाँच की जिम्मेदारी भी दीं जाने लगी| शुरुवात में स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट की दो विंग थी| इनमे एक सामान्य अपराध विंग और दूसरा आर्थिक अपराध विंग थी| सामान्य अपराध विंग केंद्रीय सरकार और सरकार के उपक्रमों के बीच कर्मचारियों से जुड़े रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के मामलो की जाँच करता था| वही आर्थिक अपराध विंग आर्थिक राजकोष नियमो के उल्लंघन के अलग अलग मामलो की जाँच करता था| इस व्यवस्था के तहत सामान्य अपराध विंग की हर राज्य में कम से कम एक शाखा थी और अपराध विंग की दिल्ली, मद्रास, मुंबई और कोलकाता में सखाये थी| प्रत्येक शाखा का क्षेत्र के राज्यों तक फैला हुआ था|

सीबीआई के जाँच के तरीको से देश में उसकी लोकप्रियता और विश्वसनीयता बढ़ती गयी| इसी के साथ इसकी भूमिका में विस्तार की रह खुलने लगी| सीबीआई की जाँच पर निष्पक्षता और भरोसा भी बढ़ता गया| धीरे-धीरे हत्या, अपहरण, आतंकवाद जैसे परम्परागत मामलो के जाँच करने की मांग उठने लगी| इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट और देश के अलग अलग हाई कोर्ट ने पीड़ित पार्टियों के ओर से दर्ज की गयी याचिकाएं जाँच करने के लिए सीबीआई को सौपनी शुरू केर दीं| इस श्रेणी में आने वाले कई मामलो की सीबीआई जाँच की जा रही थी| ऐसे मामलो लिए स्थानीय अधिकार क्षेत्र वाले शाखाओ की जरूरत महसूस हुयी| 1987 में सीबीआई दो जाँच विभाग- भ्रष्टाचार निरोधक प्रभाग (एंटी-करप्शन डिवीज़न) और विशेष अपराध प्रभाग (स्पेशल क्राइम डिवीज़न) का गठन करने का फैसला किया गया| विशेष अपराध प्रभाग आर्थिक अपराधों के साथ-साथ परम्परागत अपराधों की भी जाँच करता है|

सीबीआई डिवीजन

भारत सरकार ने निम्नलिखित विभागों के साथ 1 अप्रैल, 1963 के एक प्रस्ताव द्वारा केन्द्रीय जांच ब्यूरो की स्थापना की:

1. जांच और भ्रष्टाचार विभाग (दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान)
2. तकनीकी प्रभाग
3. अपराध रिकॉर्ड्स और सांख्यिकी विभाग
4. अनुसंधान प्रभाग
5. कानूनी और सामान्य प्रभाग
6. प्रशासन विभाग

सीबीआई और सीआइडी में अंतर

सीआइडी राज्य की सुरक्षा सम्बन्धी मामलो के साथ साथ राष्ट्रीय महत्व के मामलो की जाँच का काम करती है| पहले ये एजेंसी केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन थी लेकिन 1985 में सीबीआई को गृह मंत्रालय से हटा कर कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अधीन किया गया| ये देश की सर्वोच्च और केंद्रीय जाँच एजेंसी है| अब बात ये आती है की सीबीआई बाकि जाँच एजेंसी से कैसे अलग है| इस बात को समझने के लिए हमे सीबीआई और सीआइडी के अंतर को समझना होगा| ये सामान्य तौर पर दो अलग-अलग जाँच एजेंसी है और इनके जाँच का दायरा भी अलग-अलग होता है| सीआइडी जहाँ एक प्रदेश के अंदर घटित होने वाले घटनाओ की जाँच करती है और ये राज्य सरकार के आदेश पर काम करती है| वही सीबीआई पुरे देश में होने वाले घटनाओ की जाँच का काम संभालती है और इसको आदेश देने का अधिकार केंद्र सरकार, उच्च-न्यायलय और सुप्रीम कोर्ट के पास होता है|

सीबीआई यानि सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन राष्ट्रीय स्तर पर होने वाले अपराधों जैसे घोटाला, हत्या, भ्रष्टाचार और राष्ट्र हितो से होने वाले मामलो से सम्बंधित अपराधों की भारत सरकार की तरफ से जाँच का काम करती है| सीबीआई का मुख्यालय दिल्ली में है| दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान पुलिस अधिनियम, 1946 में सीबीआई को जाँच की शक्तिया दी गयी है| भारत सरकार, राज्य सरकार की सहमति से राज्य के मामलो के जाँच करने की अनुमति देते है हाला की हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट राज्य सरकार के अनुमति के बिना ही देश के किसी भी राज्य में आपराधिक मामले में जाँच के लिए सीबीआई को आदेश दे सकते है| सीआइडी की फुल फॉर्म क्रिमिनल इन्वेस्टीगेशन डिपार्टमेंट है जो एक राज्य में अपराध जाँच विभाग के रूप में जानी जाती है| ये प्रदेश में पुलिस का जाँच और ख़ुफ़िया विभाग है| इस विभाग को हत्या, दंगा, अपहरण, चोरी जैसे मामलो के जाँच के काम सौपे जाते है| सीआइडी की स्थापना पुलिस आयोग की सिफारिश पर ब्रिटिश सरकार ने 1902 में की थी| पुलिस कर्मचारियों को इसमें शामिल करने से पहले विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है| इस एजेंसी को जाँच का जिम्मा सम्बंधित राज्य सरकार और कभी-कभी उस राज्य की हाई कोर्ट से दिया जाता है| अतः सीआइडी का कार्य क्षेत्र छोटा, एक प्रदेश तक सिमित होता है जबकि सीबीआई का कार्य क्षेत्र बड़ा है| इन विवरणों से स्पष्ट है की सीबीआई की शक्तिया और दायरा सीआइडी से बहुत ज्यादा होता है| सीबीआई की टीम भी बहुत बड़ी होती है|

Note: 2 फ़रवरी 2019 को सीबीआई के नए चीफ मध्यप्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ऋषि कुमार को बनाया गया है। वो 1983 बैच के आईपीएस अफसर है। सीबीआई डायरेक्टर के तौर पर उनका कार्यकाल दो साल का होगा। 

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