zojila-tunnel-project

जोजिला सुरंग: क्यों हैं खास

जोजिला सुरंग

एक समय था जब श्रीनगर, करगिल और लेह के बीच में संपर्क करना बहुत ही मुश्किल था। पर अब ये इतना भी मुश्किल नहीं रह जाएगा और इसकी सिर्फ एक वजह जोजिला सुरंग हैं। इस टनल ने एशिया में एक नई पहचान हासिल की हैं तो जाहिर हैं इसमें जरूर कुछ न कुछ तो खास बात होगी ही। आइये जानते हैं इस सुरंग के बारे में कुछ रोचक तथ्य जो इसे इतना प्रसिद्ध बनाती हैं।

 

एशिया की सबसे लंबी सुरंग की लम्बाई, खर्च इत्यादि

जोजिला टनल एशिया की सबसे लम्बी द्वि-दिशात्मक सुरंग होगी मतलब आने-जाने के दो रास्ते होंगे यहां। ये इंडिया के सुरक्षा के दृष्टि से महत्वपूर्ण तो हैं ही साथ ही 6 महीने तक इंडिया से कटे रहने के कारण स्थानीय लोगो के लिए भी बेहद जरूरी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 19 मई 2018 को इस सुरंग का उद्घाटन किया। अब इस रोड टनल को पूरा होने में सात साल लगेंगे अर्थात 2026 तक बनकर तैयार हो जाएगा। ये टनल 14-15 किलोमीटर की होगी। सुरंग निर्माण की लागत लगभग 6,809 करोड़ रुपये होगी।

 

भारत के लिए जोजिला सुरंग का महत्व

जोजिला दर्रा श्रीनगर-करगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर 11,578 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। सर्दियों में भारी हिमपात से तापमान माइनस 45 डिग्री सेल्सियस से भी नीचे चला जाता हैं जिस कारण यह रास्ता बंद हो जाता है जिससे लद्दाख क्षेत्र का कश्मीर से सड़क संपर्क टूट जाता है। नवम्बर से जून तक यह रास्ता ब्लॉक रहता हैं और भूस्खलन और स्नोफॉल की वजह से आठ से दस फ़ीट तक बर्फ जम जाती हैं। ऐसे में बर्फ को हटाना नामुमकिन हो जाता हैं जिससे रास्ता ब्लॉक हो जाता हैं। श्रीनगर और लेह में रास्ता ब्लॉक होने से हमे वह अपने हतियार और रसद का स्टॉक वह पहले से ही रखना पड़ता था। तो ऐसे में छह माह तक ऐसे इस रास्ते का ब्लॉक होना भारत की सिक्योरिटी के साथ समझौता कर सकता हैं। जिसके निदान के लिए Zojila Tunnel बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। साथ ही साथ यहां रहने वालो की जिंदगी भी इन महीनों में बहुत खराब हो जाती थी क्योंकि रास्ता ब्लॉक होने से रिसोर्सेज बहुत काम हो जाते हैं। इस सब कारणों से वहां के क्षेत्रो का विकास भी बाधित रहता हैं एवं टूरिस्ट अट्रैक्शन भी नहीं हो पता हैं।

जोजिला टनल के लिए 1997 में पहली बार भारतीय सेना के द्वारा सर्वे किया गया था। सर्दी में रोड की कनेक्टिविटी न होने के कारण कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तान आर्मी कश्मीर में घुस आई थी और इसकी खबर इंडियन आर्मी को देर से लगी। इसके बाद 1999 में कारगिल युद्ध के बाद इस योजना को अमल में लाने की तैयारी हुई।

यह जानकारी PopularOnWeb.com द्वारा प्रदान की जा रही है और अधिक जानकारी के लिए, सदस्यता लें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *