industry revolution 4.0

औद्योगिक क्रांति 4.0 और भारत

उद्योग-धंधो ने इंसान की लाइफ को बेहद ही आसान बना दिया. जिस लाइफस्टाइल में आज हम रह रहे है एक समय ऐसा भी था जब हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते थे. लेकिन जैसे-जैसे हमारी जरूरते बढ़ती गयी हम कल-कारखानों का चेहरा भी बदलते गए. उद्योग-धंधो के इसी क्रमिक विकास को हम औद्योगिक क्रांति के नाम से जानते है. जब तक भारत में अंग्रेजो ने शासन किया तब तक भारत इतना सौभाग्यशाली नहीं था की भारत औद्योगिक क्रांति के शुरुआती फायदों का हिस्सेदार बन सके. पहली और दूसरी औद्योगिक क्रांति तब हुयी जब हमारा देश आजाद नहीं हुआ था और तीसरी औद्योगिक क्रांति के समय भारत नयी-नयी आजादी मिलने के बाद भारत बहुत सी चुनौतियों से जूझ रहा था. लेकिन बीते कुछ 7 दसको में भारत ने विकास का एक ऐसा मॉडल पेश किया जो समावेशी होने के साथ-साथ टिकाऊ भी है. अब हमारे भारत के पास इस प्रकार की युवा शक्ति और इनोवेशन का पावर हाउस है जिससे वो चौथी औद्योगिक क्रांति की अगुवाई को बिलकुल तैयार खड़ा है.

 

चौथी औद्योगिक क्रांति के तौर पर दुनिया एक शक्तिशाली ताकत के रूप में उभरते हुए दिख रही है. कुछ सेक्टर्स में भारत की चौथी औद्योगिक क्रांति को नेतृत्व देने की क्षमता को विश्व आर्थिक मंच ने भी महसूस की है. इसी वजह से विश्व आर्थिक मंच की चौथी औद्योगिक क्रांति के सेंटर बनाने के लिए भारत की साझेदारी हुई है. यह सेंटर मुंबई में बनेगा. प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 अक्टूबर 2018 को भारत के पहले और विश्व के चौथे औद्योगिक क्रांति केंद्र का सुभारम्भ किया. भारत से पहले ऐसे सेंटर सैनफ्रांसिस्को, टोक्यो और बीजिंग में है. मोदी जी ने भारत को चौथी औद्योगिक क्रांति के नेतृत्व की क्षमता और सबसे बड़े डिजिटल इंफ्रास्ट्रचर वाले देशो में से एक बताया. आज के समय में सबसे ज्यादा और सबसे सस्ता डाटा भारत में ही खपत होता है.

 

दुनिया इस समय चौथी औद्योगिक क्रांति के दहलीज पर खड़ी है और भारत की तो 50 प्रतिशत की जनसंख्या 27 वर्ष से काम आयु की है. ऐसे में चौथी औद्योगिक क्रांति के एजेंडे को लागू करने में भारत की भूमिका जिम्मेदारियों से भरी हुई है. इस क्रांति को भारत केवल इंडस्ट्रियल परिवर्तन के तौर पर नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन के भी तौर पर देख रहा है. भारत में होने वाले इनोवेशन का लाभ पूरी दुनिया और मानवता को मिलेगा. मोदी जी का मानना है कि इससे रोजगार की प्रकृति को बदला जाएगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा किया जाएगा. आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स, ब्लॉकचैन, बिग-डाटा और ऐसी तमाम कई तकनीकों में भारत के विकास को नयी ऊंचाई पर ले जाने, रोजगार के लाखो नए अवसर बनाने देश के हर व्यक्ति के जीवन को बेहतर बनाने की क्षमता है.

 

चौथी औद्योगिक क्रांति में भारत के लिए सम्भावनाये

१. आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस का फायदा और सभी क्षेत्रो में व्यापक उपयोग जैसे की आपराधिक न्याय, विनिर्माण और वित्त जैसे सेक्टर्स.
२. गरीबी कम करने, किसानो के जीवन में सुधार लाने और दिव्यांगों के जीवन को आसान बनाने में इस्तेमाल.
३. स्वास्थ सुविधा बेहतर बनाने और उसमे लगने वाले खर्च को कम करने में इस्तेमाल.
४. ब्लॉक चैन तकनीकी का इस्तेमाल सरकारी सेवाओं और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में किया जा सकता है.
५. ये तकनीकी सम्पत्ति और अन्य विवादों को कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने, करप्शन कम करने में मदद करेगी.
६. मानव रहित एयरक्राफ्ट सिस्टम यानि ड्रोन के इस्तेमाल में मदद जैसे की पैदावार बढ़ाने, खतरनाक नौकरियों को सुरक्षित बनाने आदि.

ड्रोन, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के 2022 तक किसानो की आमदनी को दुगुना करने में मदद कर सकता है. भारत जल्द ही अपनी ड्रोन पालिसी का भी ऐलान करने वाला है. चौथी औद्योगिक क्रांति की दिशा में भारत सरकार ने पहले ही सकारात्मक शुरुवात कर दी है. भारत सरकार ने स्टार्टअप इंडिया और अटल इनोवेशन मिशन जैसे प्रयासों से आवश्यक संरचनात्मक सुधार लाने और एक उद्यमी माहौल बनाने पर जोर दिया है. भारत में दुनिया की सबसे नौजवान श्रम शक्ति है. यहाँ तकनीकी योग्यता रखने वालो की एक बड़ी फ़ौज है. मोबाइल और इंटरनेट इस्तेमाल करने के मामले में भारत का विश्व में दूसरा स्थान है और दूसरे सबसे ज्यादा अंग्रेजी बोले जाने वाला देश भी है. इन सबके जरिये भारत चौथी औद्योगिक क्रांति के युग में अपने वैश्विक नेतृत्व की भूमिका को बेहतर ढंग से निभाने के लिए तैयार है.

 

चौथी औद्योगिक क्रांति क्या है?

पहली औद्योगिक क्रांति ने जहा कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था को उद्योग प्रधान अर्थव्यवस्था में बदल दिया वही दूसरी औद्योगिक क्रांति ने विद्युत के इस्तेमाल से उत्पादन की प्रक्रिया को बहुत गति प्रदान की जबकि सुचना प्रद्योगिकी ने तीसरी औद्योगिक क्रांति को अंजाम दिया. अब बारी है चौथी औद्योगिक क्रांति की. चौथी औद्योगिक क्रांति का आधार कई सारे डिजिटल तकनीकों और विनिर्माण प्रौद्योगिकियों के एक साथ उपयोग और इस्तेमाल से हुआ है. इसे इंडस्ट्री 4.0 भी कहाँ जा रहा है. इसमें न केवल डिजिटल क्षेत्र जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीनी शिक्षण, रोबोटिक्स और नए प्रकार के ऑटोमेशन शामिल है बल्कि भौतिक क्षेत्र के साथ-साथ बायो इंजीनियरिंग से जुडी नयी तकनीकी और अविष्कार भी शामिल है. इसमें मोबाइल इंटरनेट, सेंसर्स, ब्लॉक चेन, लेज़र, 3डी प्रिंटिंग, ड्रोन, आनुवंशिक प्रगतिया, जैव इंजीनियरिंग, नैनो टेक्नोलॉजी, ऊर्जा के नए स्रोत, भण्डारण प्रौद्योगिकी और क्वांटम कंप्यूटिंग आदि भी शामिल है. ये स्मार्ट फैक्ट्रीज के व्यवहार को सरल और सुगम बनाता है.

स्मार्ट फैक्ट्री एक नजर में

१. साइबर प्रणालियों, इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स और इंटरनेट ऑफ़ सर्विसेज का ताल-मेल
२. भौतिक प्रक्रियाओं की निगरानी
३. भौतिक दुनिया के आभासी रूप का सृजन
४. इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स के द्वारा साइबर भौतिक प्रणाली के तहत संवाद और सहयोग
५. इंटरनेट ऑफ़ सर्विसेज के तहत आंतरिक और संगठनात्मक सेवाओं का उपयोग

 

चौथी औद्योगिक क्रांति के फायदे

१. नए उत्पादों और सेवाओं को बढ़ावा
२. व्यक्तिगत जीवन के दक्षता और खुशियों में इजाफा
३. टैक्सी आर्डर करना, विमान का टिकट बुक करना
४. कोई सामान खरीदना या भुगतान करना
५. संगीत सुनना, फिल्म देखना या गेम खेलना
६. भविष्य में तकनीकी नवाचार दक्षता
७. उत्पादकता में दीर्घकालिक लाभ
८.परिवहन और संचार लागत कम करना
९. व्यापार में लागत का कम होना
१०. नए बाजार से आर्थिक विकास को काफी बढ़ावा

चौथी औद्योगिक क्रांति को लेकर कई तरह की आशंकाए भी जताई जा रही है जैसे इसके आने से व्यापार में असमानताएं पैदा हो सकती है. खासकर रोजगार की कमी और श्रम बाजारों को इससे परेशानी हो सकती है.

 

औद्योगिक क्रांति का विकास

18 वी सदी के अंत और 19 वी सदी के शुरू में ब्रिटेन में तकनीकी, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रो में बड़ा बदलाव हुआ. जिसे बाद में औद्योगिक क्रांति का नाम दिया गया. ये सिलसिला ब्रिटेन से शुरू होकर पूरी दुनिया में फ़ैल गया और विश्व में एक नए युग की शुरुवात हो गयी. अर्नाल्डो टॉयनबी ने अपनी पुस्तक में सबसे पहले औद्योगिक क्रांति शब्द का इस्तेमाल किया. पहली औद्योगिक क्रांति की शुरुवात वस्त्र उद्योग के मशीनीकरण के साथ हुयी. जिसमे जल और वाष्प की शक्ति से चलने वाले इंजन्स का आविष्कार हुआ. दूसरी औद्योगिक क्रांति में बिजली और रेलवे के इस्तेमाल पर जोर दिया गया. दूसरी औद्योगिक क्रांति पहली औद्योगिक क्रांति से लगभग सौ साल बाद आयी. 20 सदी के आखिरी दसक में कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी से तीसरी औद्योगिक क्रांति की शुरुवात हुई. ये एक तरह से मोबाइल युग रहा जिसने दुनिया को एक ग्लोबल गांव में बदल दिया.

इस तरह से जब औद्योगिक क्रांति शुरू हुई तो गुलामी की वजह से इस क्रांति ने भारतीय उद्योग-धंधो का नाश कर दिया और लाखो कारीगर भूखे मरने लगे. भारतीय कारीगर मशीन से प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ थे. लेकिन गुलामी के बाद भारत के विकास में भी अभूतपूर्व बदलाव आया और भारत ने भी विकास की रह पकड़ ली.

|| जय हिन्द, जय भारत ||

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